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स्टॉक मार्केट बेसिक
हम आपको बेसिक से शुरू करेंगे, बिल्कुल बेसिक से, जैसे एक टीचर बच्चे का हाथ पकड़कर सिखाता है। वैसे ही, मैं स्टॉक मार्केट की हर चीज़ आपको बेसिक से सिखाने वाला हूँ। बहुत छोटी-छोटी चीज़ों से शुरुआत करेंगे, क्योंकि जब तक आप हमारी जर्नी शुरू करेंगे, यह शुरुआत का हिस्सा है। इसके बाद जब जर्नी शुरू होगी, तो यही सब बेसिक्स आपको काम आएंगे। जब तक आप अपनी डेस्टिनी तक पहुँचेंगे (यानि कि स्टेज 3 तक), तब तक आप इतना ज्ञान प्राप्त कर चुके होंगे कि आप बाकी 90% ट्रेडर्स को पीछे छोड़ चुके होंगे।
अब, पहला टॉपिक है "कौन हो तुम?" इसका मतलब है, What is your type? आप किस प्रकार के ट्रेडर हैं? हर इंसान हर चीज़ नहीं कर सकता, और ना ही करना चाहिए। एक इंसान एक ही चीज़ में परफेक्ट होता है, तभी वह आगे बढ़ सकता है और तभी वह प्रॉफिटेबल बन सकता है। "डिसिप्लिन" कहते हैं ना? तो आपको एक ही चीज़ में डिसिप्लिन दिखाना होगा। आपको यह समझना होगा कि आप किस प्रकार के ट्रेडर हैं।
हम ट्रेडिंग तो करते हैं, लेकिन हमें यह भी नहीं पता होता कि हम किस प्रकार के ट्रेडर हैं। तो मैं यहाँ पर अलग-अलग प्रकार के ट्रेडर्स के बारे में आपको बताऊँगा। बहुत सारे प्रकार के ट्रेडर होते हैं: कुछ स्कैल्पर्स होते हैं, कुछ इंट्राडे ट्रेडर्स, स्विंग ट्रेडर्स और निवेशक (इन्वेस्टर) होते हैं।
पहले आपको यह समझने की जरूरत है कि आप किस कैटेगरी में आते हैं। इसके बाद हम यह देखेंगे कि इन कैटेगोरी को कैसे डिफाइन किया जाता है।
आपको या तो पहले से पता होगा कि आप किस कैटेगरी के अंदर आते हैं या फिर आपको यह नहीं पता होगा। तो मैं आपको इन सभी कैटेगोरी के फीचर्स बताऊँगा, ताकि आप यह तय कर सकें कि आप किस कैटेगोरी में आते हैं।
यदि आपने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है, और आप बिल्कुल बिगिनर हैं, तो मैं आज आपका डाउट क्लियर करूंगा कि आपको किस प्रकार के ट्रेडर बनना चाहिए।
इसलिए मैंने कुछ पैरामीटर्स को सेलेक्ट किया है: ट्रेडिंग टाइप, होल्डिंग पीरियड और कैपिटल रिक्वायरमेंट। इन तीन चीज़ों के आधार पर आप तय कर पाएंगे कि आपको किस प्रकार के ट्रेडर बनना चाहिए।
स्कैल्पिंग:
स्कैल्पिंग एक एक्टिव ट्रेडिंग टाइप है, जिसमें आपको मार्केट में एक्टिवली पार्टिसिपेट करना होता है। अगर आपके पास समय है और आप स्क्रीन पर ध्यान दे सकते हैं, तो यह आपके लिए है। अगर आप किसी प्रोफेशन में हैं जहां स्क्रीन के सामने बैठना मुश्किल हो, तो यह आपके लिए नहीं है।
इंट्राडे ट्रेडिंग:
इंट्राडे ट्रेडिंग में, आपको एक ही दिन में शेयर खरीदने और बेचने होते हैं। आपको यह सुनिश्चित करना होता है कि आपका ऑर्डर ब्रोकर कैंसिल नहीं करे और ट्रेडिंग का समय खत्म होने से पहले आप अपने ट्रेड को पूरा करें।
स्विंग ट्रेडिंग:
स्विंग ट्रेडिंग सेमी एक्टिव ट्रेडिंग होती है। आपको मार्केट में तो भाग लेना होगा, लेकिन आप पूरी तरह से एक्टिव नहीं रह सकते। जैसे इंट्राडे या स्कैल्पिंग में आपको लगातार ट्रैक करना होता है, वैसे स्विंग ट्रेडिंग में आप कुछ समय के लिए ट्रेड छोड़ सकते हैं और फिर वापस आकर उसे देख सकते हैं।
इन्वेस्टिंग:
इन्वेस्टिंग एक पैसिव ट्रेडिंग टाइप है। आपने एक बार निवेश किया और फिर आपको बार-बार स्टॉक्स नहीं चेक करने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, निवेश करने से पहले आपको अच्छी तरह से सोचना चाहिए।
होल्डिंग पीरियड:
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स्कैल्पिंग में, होल्डिंग पीरियड 1 से 5 मिनट का होता है।
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इंट्राडे ट्रेडिंग में, होल्डिंग पीरियड 5 से 15 मिनट होता है।
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स्विंग ट्रेडिंग में, होल्डिंग पीरियड एक दिन से लेकर एक हफ्ते तक हो सकता है, या कभी-कभी एक महीने तक।
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इन्वेस्टिंग में, होल्डिंग पीरियड 1 से 5 साल तक हो सकता है।
कैपिटल रिक्वायरमेंट:
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स्कैल्पिंग के लिए 10,000 से 50,000 तक की कैपिटल होनी चाहिए।
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इंट्राडे के लिए 1 लाख से 2 लाख तक की कैपिटल चाहिए।
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स्विंग ट्रेडिंग के लिए 2 लाख से 5 लाख तक की कैपिटल चाहिए।
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इन्वेस्टिंग में कैपिटल का कोई खास लिमिट नहीं होता है, लेकिन फिर भी ज्यादा कैपिटल होने पर बेहतर होता है।
इन तीन बातों को समझकर आप तय कर सकते हैं कि आप किस प्रकार के ट्रेडर बनना चाहते हैं।
अगर आप सोच रहे हैं कि मैं स्टॉक्स कैसे सिलेक्ट करता हूँ, या फिर स्विंग और इंट्राडे ट्रेडिंग में स्टॉक्स कैसे चुनता हूँ, तो इसके लिए मुझे एक अच्छे टूल की जरूरत पड़ती है। एक ऐसा टूल है जिसे मैं खुद यूज़ करता हूँ और वह है स्टॉक एज।
यह टूल हमें बहुत मदद करता है यह देखने के लिए कि कौन सा स्टॉक 52 वीक हाई या 52 वीक लो पर है। मैं इसका इस्तेमाल करके आसानी से स्टॉक्स की लिस्ट तैयार कर सकता हूँ। यह टूल हमें बड़े इन्वेस्टर्स के पोर्टफोलियो के बारे में भी बताता है।
दो इंटरेस्टिंग टॉपिक्स सिखाने वाला हूँ। ये सारे टॉपिक्स बेसिक हैं जो आपको आनी चाहिए, लेकिन शायद किसी ने सिखाया नहीं। अगर सिखाया है, तो मैं आपको फिर से रिफ्रेश मोड में लाकर सिखाऊँगा। हम हर एक चीज़ बेसिक से, स्टार्टिंग से सीखेंगे। आप चाहे एक नए ट्रेडर हों या पुराने, आपको यह जरूर सुनना चाहिए। मैं आपको यह कमिटमेंट दे सकता हूँ कि आप कुछ नया जरूर सीखेंगे। जब आपके बेसिक्स क्लियर हो जाएंगे और आप जर्नी के अगले स्टेज पर आ जाएंगे, तो डेस्टिनी तक पहुँचने में बहुत मजा आएगा। क्योंकि मैंने इतना बढ़िया कंटेंट रेडी किया है, जो मैं आप सबको देने वाला हूँ। मैंने अगले पूरे 100 डेज़ कैपिटल चैलेंज का कंटेंट पहले ही लिख लिया है और डिसाइड कर लिया है कि आपको क्या देने वाला हूँ।
मैं आपको माइंड-ब्लोइंग कंटेंट देने वाला हूँ, जो आपको ट्रेडिंग में मजा देगा। जो लाखों का यूट्यूब कोर्स होता है, वही कोर्स मैंने आपके लिए फ्री ऑफ कॉस्ट तैयार किया है। यह वही चीज़ें हैं, जिनकी वजह से मैं ट्रेडर बना हूँ और प्रॉफिटेबल ट्रेडर बना हूँ। वही सारी चीज़ें मैं आपको सिखाऊँगा 100 डेज़ कैपिटल चैलेंज में।
अब हम आज के टॉपिक की शुरुआत करते हैं: "टाइप ऑफ ऑर्डर्स" के बारे में। बहुत सारे लोगों का डाउट आया कि सर हमें बाय कैसे करना है, सेल कैसे करना है। तो बहुत सारी दिक्कतें आती हैं। बहुत सारे ऑर्डर्स होते हैं जैसे मार्केट ऑर्डर, लिमिट ऑर्डर। और यह भी कहा जाता है कि जब हम बाय करते हैं तो ऑपरेटर हमारी क्वांटिटी पकड़ लेता है, और उसके बाद मार्केट रिवर्स हो जाती है।
मैं आपको आज यह सारी बातें क्लियर कर दूँगा।
मार्केट में तीन प्रकार के ऑर्डर होते हैं:
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मार्केट ऑर्डर
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लिमिट ऑर्डर
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स्टॉप लॉस ऑर्डर
मार्केट ऑर्डर का मतलब है कि आप जिस प्राइस पे मार्केट है, उसी प्राइस पे बाय कर लें।
लिमिट ऑर्डर का मतलब है कि आपने एक लिमिट सेट कर दी, जैसे ₹21, और जब मार्केट उस प्राइस पे आएगी, तो ऑटोमेटिक बाय हो जाएगा।
स्टॉप लॉस ऑर्डर का मतलब है कि आपने किसी ट्रेड में ₹10 पे एंट्री की थी, और आपने यह तय किया कि अगर मार्केट ₹15 पे आती है या ₹15 से नीचे जाती है, तो आप ऑटोमेटिकली एक्सिट हो जाएंगे।
इसके बाद, मैं आपको बताऊँगा कि स्टॉप लॉस कैसे बचाता है। अगर आप स्टॉप लॉस का सही इस्तेमाल नहीं करते, तो अनावश्यक लॉस हो सकता है। अगर आप जल्दी एग्जिट नहीं कर पाते, तो आपको बड़ा नुकसान हो सकता है।
अभी मैं आपको इन तीनों ऑर्डर्स के बारे में बेसिक जानकारी दे रहा हूँ।
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मार्केट ऑर्डर: जहां पर भी मार्केट है, वहाँ ऑटोमेटिक बाय हो जाता है।
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लिमिट ऑर्डर: आपने एक लिमिट तय की, जैसे ₹20, और जब मार्केट उस लिमिट तक पहुंचेगी तो बाय हो जाएगा।
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स्टॉप लॉस ऑर्डर: जब आप ट्रेड कर रहे हैं और आपने स्टॉप लॉस सेट किया है, तो जब मार्केट उस लिमिट तक पहुँचती है तो आप ऑटोमेटिकली बाहर हो जाते हैं।
अब, अगर आप स्टॉक ऑप्शन में ट्रेड करते हैं, तो आपको लिमिट ऑर्डर का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।
मार्केट ऑर्डर का इस्तेमाल आप तभी करें जब आप नए ट्रेडर हों और आपको ट्रेडिंग में ज्यादा अनुभव न हो।
कुछ लोग जो मैनिपुलेशन करते हैं, वे मार्केट ऑर्डर का इस्तेमाल करके किसी को फंसा सकते हैं।
अगर आप लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको स्क्रीन पर ध्यान रखना होगा और यह देखना होगा कि बायर और सेलर कहां हैं।
फिर हम प्री मार्केट और लाइव मार्केट के बारे में बात करेंगे, और किस टाइम पर ट्रेड करना चाहिए, ये सब सीखेंगे।
अब, हम एक और इंटरेस्टिंग टॉपिक पर बात करेंगे: ट्रेडिंग टाइम जोन्स। ट्रेडिंग का भी एक टाइम होता है, जैसे स्कूल में एक टाइम होता है, वैसे ही ट्रेडिंग में भी एक टाइम होता है।
हमारी इंडियन मार्केट में कुछ खास टाइम जोन होते हैं, जैसे:
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प्री मार्केट टाइमिंग (9:00 बजे से 9:15 बजे तक)
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लाइव मार्केट टाइम (9:15 बजे से 3:15 बजे तक), जिसमें स्टेज 1 (9:15-11:15), स्टेज 2 (11:15-1:15), और स्टेज 3 (1:15-3:15) आते हैं।
इन स्टेज़ में ट्रेडिंग के दौरान बड़े मूव्स कैसे आते हैं, इसके बारे में हम और बात करेंगे।
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